मेरी कलम से
वीरेन्द्र भाईसाहब की पुस्तकें
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चिट्ठास्वामी: कृष्णा वीरेन्द्र न्यास
वीरेन्द्र भाईसाहब: एक परिचय
न्यास के द्वारा प्रकाशित नयी पुस्तकें
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बुधवार, जुलाई 30, 2008
कृष्ण की मृत्यु और कलियुग की प्रारम्भ
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महाभारत के युद्घ में अठारह अक्षौहिणी सेना नष्ट हो गई। (एक अक्षौहिणी में २१,८७० रथ, २१,८७० हाथी, १,०९,३५० पैदल और ६५,६१० घुड़सवार होते थे।) क...
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गुरुवार, जुलाई 24, 2008
महाभारत में, कृष्ण की धर्म शिक्षा
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महाभारत युद्घ को लेकर ऎसा ही एक वितंडा है। कृष्ण ने कहा, 'धर्म की संस्थापना के लिए मैंने जन्म लिया है।' ('परित्राणाय साधूनां व...
मंगलवार, जुलाई 15, 2008
कृष्ण की सोलह हजार एक सौ रानियों
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श्रीमद्भागवत में उस समय का रूपक है— ‘लाखों दैत्यों के दल ने घमंडी राजाओं का रूप धारण कर अपने भार से धरती को आक्रांत कर रखा था। उसने गौ का र...
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बुधवार, जुलाई 02, 2008
कृष्ण लीला: अवतारों की कथा
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दु:ख और जोखिम से भरा कृष्ण का बहुआयामी जीवन अगले अवतार की कहानी है। इस दुनिया का कौन सा ऐसा कष्ट है जो कृष्ण ने मुसकराते न झेला हो; कौन ...
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मंगलवार, जून 24, 2008
राम कथा: अवतारों की कथा
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उत्तरी भारत में सरयू नदी के तट पर बसी अयोध्या,जहॉं त्रेता युग में दशरथ के पुत्र राम का जन्म हुआ था। अयोध्या, अर्थात् जहॉं कभी युद्ध ...
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