मेरी कलम से
वीरेन्द्र भाईसाहब की पुस्तकें
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चिट्ठास्वामी: कृष्णा वीरेन्द्र न्यास
वीरेन्द्र भाईसाहब: एक परिचय
न्यास के द्वारा प्रकाशित नयी पुस्तकें
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शनिवार, अगस्त 30, 2008
बौद्ध धर्म का विकास
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परिनिर्वाण के बाद शीघ्र ही राजगृह में बौद्घ 'संगीति' (शाब्दिक अर्थ जहां संगायन अर्थात् उपदेश गाए तथा बुद्घ-वचन दोहराए जाएं) बुलाई गई...
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शनिवार, अगस्त 23, 2008
सिद्धार्त से गौतम बुद्ध तक का सफर
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इन श्रमण परंपराओं और जैन मत की भूमिका में यह कहानी उभरती है, जिसने एशिया महाद्वीप की काया-पलट कर दी और अंततोगत्वा सारे संसार को प्रभावित किय...
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शुक्रवार, अगस्त 15, 2008
जैन धर्म
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जैन परंपरा के अनुसार उनके प्रथम तीर्थंकर (प्रवर्तक अथवा शास्त्रकार) ऋषभदेव थे, जिनका उल्लेख भागवत पुराण में (एकादश स्कंध के चतुर्थ अध्याय ...
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बुधवार, अगस्त 06, 2008
बौद्घ धर्म
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वेदव्यास के पुत्र शुकदेव के मुख से विष्णु के अवतारों की गाथा परीक्षित ने सुनी थी। वह 'भागवत पुराण' में संगृही है। यह बुद्घ के जन्म स...
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बुधवार, जुलाई 30, 2008
कृष्ण की मृत्यु और कलियुग की प्रारम्भ
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महाभारत के युद्घ में अठारह अक्षौहिणी सेना नष्ट हो गई। (एक अक्षौहिणी में २१,८७० रथ, २१,८७० हाथी, १,०९,३५० पैदल और ६५,६१० घुड़सवार होते थे।) क...
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