मेरी कलम से
वीरेन्द्र भाईसाहब की पुस्तकें
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चिट्ठास्वामी: कृष्णा वीरेन्द्र न्यास
वीरेन्द्र भाईसाहब: एक परिचय
न्यास के द्वारा प्रकाशित नयी पुस्तकें
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सोमवार, जनवरी 26, 2009
अन्य देशों में मानवाधिकार और स्वत्व
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इस स्वत्व के साथ जुड़ा है व्यक्तिगत स्वतंत्रता का प्रश्न। पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरोप की सभी प्राचीन सभ्यताओं में मानव समाज के कलंक '...
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मंगलवार, जनवरी 20, 2009
प्राचीन भारत में मानवाधिकार
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तीसरी बुनियादी धारणा मानव-मूल्यों को लेकर है। आज सारे संसार में मानवाधिकार ( human rights ) को लेकर बतंगड़ खड़ा किया जाता है और इसकी होड़ मे...
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शनिवार, जनवरी 10, 2009
सभ्यता का एक मापदंड वहाँ नारी की दशा है
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समाज में सभ्यता का एक मापदंड वहाँ नारी की दशा है। लगभग दो शताब्दियों से स्त्री-स्वतंत्रता की आवाज संसार में उठ रही है। पर भिन्न सामाजिक प्रण...
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रविवार, जनवरी 04, 2009
समता और इसका सही अर्थ
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कुछ आधारभूत अभिधारणाएं हैं जिनपर सभ्यता के प्रारंभिक चरण बढ़े। समाज के अंदर एक आंतरिक स्नेह-बंधन, घटकों को जोड़ने वाला सीमेंट, एक ढंग की परं...
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गुरुवार, दिसंबर 25, 2008
मनु स्मृति और बाद में जोड़े गये श्लोक
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संसार में जितनी विधि-प्रणालियां हैं, वे एक विशेष कालखंड में एक विशिष्ट समाज के लिए बनीं थीं। मनु-प्रणीत विधि की इन सब प्रणालियों से तुलना नह...
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