मेरी कलम से
वीरेन्द्र भाईसाहब की पुस्तकें
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चिट्ठास्वामी: कृष्णा वीरेन्द्र न्यास
वीरेन्द्र भाईसाहब: एक परिचय
न्यास के द्वारा प्रकाशित नयी पुस्तकें
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शुक्रवार, फ़रवरी 20, 2009
गणतंत्र की प्रथा प्राचीन भारत से शुरू हुई
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सामाजिक जीवन की चौथी मूल धारणा उन राजनीतिक विचारों को लेकर है, जिन्हे 'प्रजातंत्र' ( Democracy ) के नाम से जाना जाता है। सामाजिक व्य...
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रविवार, फ़रवरी 08, 2009
विधि का विकास स्थिति (या पद) से संविदा की ओर हुआ है
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इसी प्रकार 'जल' तो प्राणिमात्र को देना होगा। प्यासे को ना नहीं करेंगे, क्योंकि यह उसका स्वत्व है। यही कारण है कि जल का मूल्य अथवा प्...
2 टिप्पणियां:
रविवार, फ़रवरी 01, 2009
भारतीय विधि ने दास प्रथा कभी नहीं मानी
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द्वितीय महायुद्घ के बाद धीरे-धीरे एशिया-अफ्रीका के देश स्वतंत्र हुए और संसार के जीवन में बदलाव आया। मानव जाति मुसलिम और यूरोपीय साम्राज्यवाद...
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सोमवार, जनवरी 26, 2009
अन्य देशों में मानवाधिकार और स्वत्व
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इस स्वत्व के साथ जुड़ा है व्यक्तिगत स्वतंत्रता का प्रश्न। पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरोप की सभी प्राचीन सभ्यताओं में मानव समाज के कलंक '...
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मंगलवार, जनवरी 20, 2009
प्राचीन भारत में मानवाधिकार
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तीसरी बुनियादी धारणा मानव-मूल्यों को लेकर है। आज सारे संसार में मानवाधिकार ( human rights ) को लेकर बतंगड़ खड़ा किया जाता है और इसकी होड़ मे...
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