मेरी कलम से
वीरेन्द्र भाईसाहब की पुस्तकें
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चिट्ठास्वामी: कृष्णा वीरेन्द्र न्यास
वीरेन्द्र भाईसाहब: एक परिचय
न्यास के द्वारा प्रकाशित नयी पुस्तकें
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बुधवार, फ़रवरी 27, 2008
रूपक कथाऍं वेद एवं उपनिषद् के अर्थ समझाने के लिए लिखी गईं
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सारे संसार में जनश्रुतियॉं मिलती हैं। भारत को छोड़ अन्य सभ्यताओं में ये पहले प्रकट हुईं और बाद में लिखे गए शास्त्र, दर्शन और विज्ञान। लेक...
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मंगलवार, फ़रवरी 19, 2008
सभ्यता की प्रथम किरणें एवं दंतकथाऍं
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कालचक्र: सभ्यता की कहानी भौतिक जगत और मानव मानव का आदि देश सभ्यता की प्रथम किरणें एवं दंतकथाऍं -१- मानव जीवन में सभ्यता की सचेतन धारा कब ...
3 टिप्पणियां:
मंगलवार, फ़रवरी 12, 2008
देशों की जनश्रुतियों में साम्य है
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इन जनश्रुतियों में अंतर्निहित ऐतिहासिक तथ्य क्या हैं, यह खोजना पुरातत्व का कार्य है। मेरे छोटे बाबाजी (चौ. धनसराजसिंह) ने इसके लिए अपना त...
सोमवार, फ़रवरी 04, 2008
जनश्रुतियों या दंतकथाओं में भी सत्यता होती है
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आदि मानव ने घटनाओं को अपने स्वप्न और कल्पना में घोलकर कहानियॉं रचीं। विशेषकर सर्वनाशी भयानक विपत्तियों और उनके निराकरण के प्रसंगों ने, वी...
2 टिप्पणियां:
गुरुवार, जनवरी 31, 2008
रिलिजन के लिये हिन्दी में उपयुक्त शब्द - संप्रदाय या पंथ
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कृषि के लिए ऋतुओं का ज्ञान आवश्यक था। प्रथम काल-गणना तो दिन एवं चंद्रमास द्वारा प्रारंभ हुई। आज भी अरब देशों में चंद्रमास से वर्ष गिनने के ...
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