मेरी कलम से
वीरेन्द्र भाईसाहब की पुस्तकें
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चिट्ठास्वामी: कृष्णा वीरेन्द्र न्यास
वीरेन्द्र भाईसाहब: एक परिचय
न्यास के द्वारा प्रकाशित नयी पुस्तकें
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सोमवार, मार्च 31, 2008
अमृत-मंथन कथा की सार्थकता: अवतारों की कथा
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एक बार असुरों ने तीखे शस्त्रों से देवताओं को पराजित किया। अनेक देवता रणभूमि में गिरकर उठ न सके। स्वयं इंद्र श्रीहीन हो गए। तब ब्रम्हा ने ...
बुधवार, मार्च 26, 2008
देवासुर संग्राम की भूमिका: अवतारों की कथा
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आगे अमृत-मंथन की कथा को समझने के लिए देवासुर संग्राम की भूमिका जानना आवश्यक है। आर्यों के मूल धर्म में सर्वशक्तिमान् भगवान के अंशस्वरूप प्...
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सोमवार, मार्च 17, 2008
जल-प्लावन की गाथा
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जल-प्लावन की गाथा संसार की सभी सभ्यताओं में पाई जाती है। मनु की यह घटना सामी सभ्यताओं में ‘हजरत नू की नौका’ (Noah’s Ark) कहकर वर्णित है। ...
सोमवार, मार्च 10, 2008
वाराह अवतार
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दशावतारों में प्रथम अवतार वाराह का है। श्रीमद्भागवत में उसका वर्णन इस प्रकार है-‘ब्रम्हा ने मनु और उनकी पत्नी शतरूपा से प्रजापालन के लिए क...
गुरुवार, मार्च 06, 2008
सृष्टि की दार्शनिक भूमिका
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पुराणों का अर्थ समझने के लिए पहले सृष्टि की दार्शनिक भूमिका समझनी होगी। कहते हैं, प्रारंभ में एक ही मूल तत्व था, जिसे आदि द्रव्य (पदार्थ) ...
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