Tuesday, July 15, 2008

कृष्ण की सोलह हजार एक सौ रानियों

श्रीमद्भागवत में उस समय का रूपक है—
‘लाखों दैत्‍यों के दल ने घमंडी राजाओं का रूप धारण कर अपने भार से धरती को आक्रांत कर रखा था। उसने गौ का रूप धारण किया। (संस्‍कृत में गो का अर्थ पृथ्‍वी भी होता है।) उसके नेत्रों से ऑंसू बहकर मुँह में आ रहे थे। मन खिन्‍न था और शरीर कृश हो गया था। वह करूण स्‍वर से रँभा रही थी।‘
परंतु एक-एक कर सभी कष्‍ट- बाधाओं का कृष्‍ण के द्वारा, स्‍वयं अथवा किसी को उपकरण बनाकर, निराकरण हुआ और धर्म का राज्‍य आया।

राधा कृष्ण का चित्र विकिपीडिया से और उसी की शर्तों में

उनके जीवन में ‘धर्म’ अर्थात विधि (कानून) के प्रवर्तन का शुभ कार्य अनेक कल्पनाओं में फँसकर एक-दो बार निंदा-अपवाद बना। भौमासुर (नरकासुर) ने सोलह हजार एक सौ सुंदरी राजकन्याओं को पकड़कर अपनी राजधानी प्राज्योतिषपुर के बंदीगृह में डाल रखा था। कृष्ण ने चारों ओर पहाड़ों की किलेबंदी विदीर्ण कर, शस्त्रों की मोरचाबंदी को छिन्न-भिन्न कर, जल से भरी खाई पार कर, अग्नि, बिजली और गैस की चारदीवारियों को तहस-नहस कर, उस नगर के चारो ओर दस हजार फंदों और यंत्रों को काटकर नगर के परकोटे का घ्वंस कर दिया। घनघोर युद्घ में भौमासुर को मारकर उन स्त्रियों का उद्घार किया। उन स्त्रियों ने कहा,
'जैसे हम कोई संपत्ति हो, भौमासुर ने पाशविक बल से हमारा अपहरण किया। समाज की दृष्टि में हम पतित हैं। हम कहां जाएं?'
तब कृष्ण ने उत्तर दिया,
'यदि भौमासुर तुम्हें संपत्ति समझता था तो उसकी पराजय पर तुम मेरी हो। कौन कहेगा कि मेरे द्वारा अंगीकार करने पर तुम पवित्र और सम्मान के योग्य नहीं हो?'
समाज में उनको उचित स्थान दिलाने का कार्य कृष्ण ने किया। यह कृष्ण की कथित सोलह हजार एक सौ रानियों का प्रवाद है।

कालचक्र: सभ्यता की कहानी
०१- रूपक कथाऍं वेद एवं उपनिषद् के अर्थ समझाने के लिए लिखी गईं
०२- सृष्टि की दार्शनिक भूमिका
०३ वाराह अवतार
०४ जल-प्‍लावन की गाथा
०५ देवासुर संग्राम की भूमिका
०६ अमृत-मंथन कथा की सार्थकता
०७ कच्‍छप अवतार
०८ शिव पुराण - कथा
०९ हिरण्‍यकशिपु और प्रहलाद
१० वामन अवतार और बलि
११ राजा, क्षत्रिय, और पृथ्वी की कथा
१२ गंगावतरण - भारतीय पौराणिक इतिहास की सबसे महत्‍वपूर्ण कथा
१३ परशुराम अवतार
१४ त्रेता युग
१५ राम कथा
१६ कृष्ण लीला
१७ कृष्ण की सोलह हजार एक सौ रानियों

1 comment:

  1. Virendea Saahab Ji, Namaskar...

    Aapki lekh padhkar prasannta huyi. main ek Script-writer hun, In dino Kalki naamak Vishnu ke Avatar par kuch likhne ki Koshish kar raha hun. Aapse Asha hai agar aap meri kuch madad kar sake. Aur Kalki ke baad Vishnu ke kisi aur Avatar ka Ullekkh mujhe nhi mila. Kya aap Marga-darshan kar sakenge?

    mujhe neeche diye pato ar sampark karien.
    Dhanyawaad


    Swapnil Jharia
    F-76, Bakhtawar-Ram Nagar,
    Near Ajit Club,
    Indore 452001

    9teen.valentine@gmail.com
    +919179190709

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