Sunday, August 22, 2010

अंध महाद्वीप, अफ्रीका

एक महाद्वीप है अफ्रीका, जिसे यूरोप सदा 'अंध महाद्वीप' (The dark continent) कहता रहा। उस समय के यूरोप के लिए भूमध्य सागर के देशों के अतिरिक्त अफ्रीका एक अनजान प्रदेश था, जहाँ रास्ते में भयांकित करती सहारा मरूभूमि प्रेत बनकर खड़ी थी। पर भारत के लिए वह अँधियारा न था। अति प्राचीन काल से भारतवासी अफ्रीका का पूर्वी तट जानते थे। वहाँ के निवासियों को अनेक नामों  से पुराणों एवं महाभारत में पुकारा गया है। परन्तु  उसके अन्दर का भाग शेष दुनिया के लिए अनजान ही रहा। वहाँ कभी कोई बड़ी सभ्यता पनपी होगी, ऎसी किंदवंती अथवा परम्परा नहीं है। केवल 'जिंबाब्वे' (शाब्दिक अर्थ 'पत्थर के घर') में  'म्तिलिक्वे' (Mtilikwe या  Mutirikwe) नदी के प्रारंभिक चरणों पर पुरानी, पत्थर की छतरहित दीवारें और उन्हें जोड़ते गलियारे तथा सीढ़ियाँ पाई गईं, जो आज भी रहस्य बनी हैं। दंतकथाओं एवं लिपि के अभाव में अफ्रीका का अंतररहस्य आच्छादित रहेगा। आज पुरातत्वज्ञ विश्वास करते हैं कि वहाँ कोई तेजस्वी सभ्यता का जीवन शायद उत्पन्न नहीं हुआ। वैसे अरब निवासियों और मुसलमानों के आक्रमण होते रहे। वहाँ से वे लूटपाट कर गुलाम लाते और भूमध्य सागर तथा यूरोप के बाजारों में बेचते। इस प्रकार के बहुत हब्शी गुलाम मुगल सेना में थे।पर भारत ने कभी ऎसा जघन्य कार्य नहीं किया। उनके व्यापारिक संबंध अफ्रीका के पूर्वी तट से थे। भरतीयों ने उनको कभी गुलाम नहीं बनाया, वरन् उनकी स्वतंत्र प्रतिभा को प्रोत्साहन दिया। 


Cape of good hope चित्र विकिपीडिया से
भारत के संबंध का साक्षी कोणार्क (उत्कल : उड़ीसा) के प्रसिद्घ सूर्य मंदिर में दीवारों पर उत्कीर्ण 'जिराफ' (giraffe) है। कहा जाता है कि उत्कल के साहसी नाविकों द्वारा, अफ्रीका के कबीलों की, उत्कल के राजा को दी गई कृतज्ञतापूर्ण भेंट, जिराफ का जोड़ा वहाँ लाकर उद्यान में कभी रखा गया था। कोणार्क के मंदिर में जब संपूर्ण पृथ्वी का ज्ञान उत्कीर्ण किया गया तो जिराफ के चित्र ने प्राणिशास्त्र के विभाग में स्थान पाया। इतिहास बताता है कि जब 'वास्को दि गामा' (Vasco de Gama) ने अफ्रीका के आशा अंतद्वीप (Cape of Good Hope) का चक्कर काटकर भारत पहुँचाना चाहा तो डरबन (Durban) से दक्षिण अफ्रीका में व्यापार के निमित्त गए एक भारतीय ने उसे भारत की राह दिखाई।

कालांतर में मुसलिम और फिर ईसाई धर्मांधता ने अफ्रीका की स्थानिक सभयता को, जो कुछ भी थी, नष्ट कर दिया। इनपर किए गए अत्याचारों की कहानी लंबी है।

प्राचीन सभ्यताएँ और साम्राज्य
०१ - सभ्यताएँ और साम्राज्य
०२ - सभ्यता का आदि देश
०३ - सारस्वती नदी व प्राचीनतम सभ्यता
०४ - सारस्वत सभ्यता
०५ - सारस्वत सभ्यता का अवसान
०६ - सुमेर
०७ - सुमेर व भारत
०८ - अक्कादी
०९ - बैबिलोनिया
१० - कस्सी व मितन्नी आर्य
११ - असुर जाति
१२ -  आर्यान (ईरान)
१३ - ईरान और अलक्षेन्द्र (सिकन्दर)
१४ - अलक्षेन्द्र और भारत
१५ - भारत से उत्तर-पश्चिम के व्यापारिक मार्ग
१६ - भूमध्य सागरीय सभ्यताएँ
१७ - मिस्र सभ्यता का मूल्यांकन
१८ - पुलस्तिन् के यहूदी
१९ - यहूदी और बौद्ध मत
२० - जाति संहार के बाद इस्रायल का पुनर्निर्माण
२१ - एजियन सभ्यताएँ व सम्राज्य
२२ - फणीश अथवा पणि
२३ - योरोप की सेल्टिक सभ्यता
२४ -  योरोपीय सभ्यता के 'द्रविड़'
२५ - ईसाई चर्च द्वारा प्राचीन यरोपीय सभ्यताओं का विनाश
२६ - यूनान
२७ - मखदूनिया
२८ - ईसा मसीह का अवतरण
२९ - ईसाई चर्च
३० - रोमन साम्राज्य
३१ - उत्तर दिशा का रेशमी मार्ग
३२ -  मंगोलिया
३३ - चीन
३४ - चीन को भारत की देन 
३५ - अगस्त्य मुनि और हिन्दु महासागर
३६ -  ब्रम्ह देश 
३७ - दक्षिण-पूर्व एशिया
३८ - लघु भारत 
३९ - अंग्कोर थोम व जन-जीवन
४० - श्याम और लव देश
४१ - मलय देश और पूर्वी हिन्दु द्वीप समूह
४२ - चीन का आक्रमण और निराकरण
४३ - इस्लाम व ईसाई आक्रमण
४४ - पताल देश व मय देश
४५ - अमेरिका की प्राचीन सभ्याताएं और भारत
४६ - दक्षिण अमेरिका व इन्का
४७ - स्पेन निवासियों का आगमन
४८ - अंध महाद्वीप, अफ्रीका

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