शनिवार, अगस्त 01, 2009

अक्कादी

Akkadian ruler (National Museum of Iraq)अक्काड के राजा का चित्र विकिपीडिया से

अनुशासनयुक्त पंक्तिबद्घ लड़ने के कारण सुमेर निवासी आसपास की जंगली जातियों के आक्रमण बचा सके पर अंत में उत्तरी भाग की एक सामी जाति 'अक्कादी' के वे शिकार बने। इन अक्कादियों ने धनुष-बाण के व्यापक प्रयोग के कारण ऐतिहासिक युग के प्रारंभ में (लगभग ३२०० वर्ष विक्रम संवत् पूर्व) सुमेर पर विजय प्राप्त की। जनश्रुतियों के अनुसार सामी इतिहास में 'राष्ट्रीय वीर' कहलाने वाला यह अक्काद (अगाद) का 'शरगुण' प्रथम (Sargon-I) था, जो काबुल (बैबिलोनिया) का 'महान विजेता' कहा जाता है। एक पौराणिक गाथा में वह कहता है,
'मैं शरगुण अक्काद का शक्तिशाली राजा हूँ। मेरी माँ निर्धन थी, अपने पिता को मैं नहीं जानता। मेरी माँ ने मुझे गुप्त रूप से जन्म देकर सरकंडे के संदूक में बंद कर बहा दिया। मुझे अक्की नामक माली ने पाया और पाल-पोसकर माली बनाया।'
वैसे कर्ण का यह आख्यान उसके संदर्भ में काल्पनिक कहा जाता है। इसी आख्यान में आगे वर्णन है कि कैसे यह राज्य कर्मचारी विद्रोह करके राजा बना। यह नाम 'शरगुण' (शर-यानी बाण-जिसका गुण है) बेबीलोनिया के अनेक राजाओं ने धारण किया। इसी नाम पर 'शरगुण का युग' का प्रारंभ कहा जाता है, जिसकी विरूदावली गायी गयी। 'शरगुण' व 'अर्जुन' समानार्थी नाम हैं।

यह युग अथवा साम्राज्य भी स्थायी न रहा। अक्कादियों की स्वयं की कोई सभ्यता न थी। उन्होंने कुछ सुमेरी सभ्यता अपना ली और धीरे-धीरे उसी रंग में रंगते गए। अक्कादियों का सुमेरीकरण होता गया; पर एक जाति के रूप में सुमेर और उनकी संस्कृति का पतन हो गया। सामाजिक धारणाओं का सामीकरण प्रारंभ हुआ। आज अक्कादी शरगुण (सारगोनी) युग की जितनी महिमा गायी जाती है, वह सुमेरी सभ्ययता की देन है। उसकी कला और साहित्य, भव्य नए मंदिर तथा राजप्रासाद, सुमेरियन कानून एवं धर्म पुस्तकों का और पौराणिक आख्यानों का सामी भाषा में अनुवाद, इनके मिस्त्र के पिरामिडों की तरह बने कृत्रत पर्वतों के आकार के 'जिगुरत' (शाब्दिक अर्थ पर्वत-निवास), जहाँ ऊपरी मंजिल के मंदिरों में देवताओं का निवास कहते थे, यह सब मूल में सुमेरी ही है।

पर सुमेर का वह लोकतंत्र, उनकी सभा-समिति गयी। साम्राज्यों के चकाचौंध करने वाले ऐश्वर्य में संस्कृति की आत्मा, समता, स्त्री-पुरूष की समानता, व्यक्तिगत स्वतंत्रता के साथ एक सामूहिक जीवन और छोटे-बड़े सभी के सामूहिक भूमि में श्रम की अनिवार्यता भी लोकतंत्र के साथ गई और आई सामी सभ्यताओं की पादशाही। उसके बाद जब फिर सुमेरी पुनरूत्थान का समय आया तब शांतिकाल की वह संस्कृति पुनरपि उदय न हो सकी। इन दिनों पुन: दुंगी के नेतृत्व में सुमेर के दिन लौटे। उसने एलम को जीता, सभी नगरों में (सुसा में भी) विभिन्न मंदिर निर्मित हुए और पुन: विधिसंहिता बनी। राजाओं ने 'सुमेर तथा अक्काद का स्वामी' की पदवी धारण की, पर सुमेर का वह प्रजातंत्र, उसका सांस्कृतिक जीवन न लौटा।


प्राचीन सभ्यताएँ और साम्राज्य


०१ - सभ्यताएँ और साम्राज्य
०२ - सभ्यता का आदि देश
०३ - सारस्वती नदी व प्राचीनतम सभ्यता
०४ - सारस्वत सभ्यता
०५ - सारस्वत सभ्यता का अवसान
०६ - सुमेर
०७ - सुमेर व भारत
०८ - अक्कादी

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