Sunday, August 23, 2009

असुर जाति

लगातार एक हजार वर्षों तक सतत युद्घ के कारण युद्घ करना ही असुर जाति का पेशा बन गया और वे स्वयं क्रूर एवं अत्याचारी हो गए। जिन नगरों को उन्होंने जीता, उनका क्वचित् नागरिक ही सामूहिक हत्याकांड से बच पाया। प्रमुख लोगों के हाथ-पैर, नाक-कान काटकर, आँखें फोड़कर वे उन्हें मीनारों से नीचे फेंक देते, अथवा ऐसे विजितों को बच्चों सहित धीमी आग में जलाया जाता। उनके अंतिम शक्तिशाली 'सम्राट्' असुरबनिपाल (Ashurbanipal) ने एलम (Elam) को जीतने के बाद कैदियों को पीट-पीट कर मार डाला, एलम के सेनापति को जीवित जला दिया। वहाँ के राजा का सिर काटकर राजकीय भोज के अवसर पर वृक्ष से लटकाया गया। उसके भाई के टुकड़े-टुकड़े कर देश भर में बाँटे गए। अंत में स्वतंत्रता की कामना करने के कारण सुसा नगरी का ध्वस्त कर दिया। वहाँ की जनता को खदेड़ दिया गया। असुरबनिपाल ने स्वयं एक नगर को जीतने का वर्णन किया है कि कैसे उसने,
'तीन हजार शत्रु सैनिकों को मौत के घाट उतारा, कैसे बंदियों को जला दिया, अंग काट डाले, आँखे निकाल लीं और उनके सिरों को नकर में खंभों पर लटकाया तथा नगर के युवक-युवतियों को जला दिया।'
असुरबनिपाल रथ पर शेर के शिकार करते हुऐ - चित्र विकिपीडिया के सौजन्य से


एक भित्तिचित्र में 'असुर' (उनका देवता) के सम्मुख शत्रुओं की बलि होते दिखाया गया है। इन नृशंस क्रूर अत्याचारों की विज्ञप्तियाँ, उनकी कथाएँ प्रचारित की गई कि राक्षसत्व भी लजा जाए। 'असुर' शब्द ही भयानक अत्याचारी का पर्याय बना।

अरब देश और संपूर्ण मध्य-पूर्व का जीवन इन विभीषिकाओं के भरा है। इतिहास अकथ्नीय अत्याचारों को वीरों की विजयगाथा कहकर, राक्षसत्व के पंक में डूबे इन साम्राज्यों की प्रशंसा करता है। इसी असीरियन सभ्यता में परदे की प्रथा का जन्म हुआ और पुरूष को चाहे जितनी पत्नियाँ रखने की छूट मिली। वहाँ मानव-मूल्य युद्घ के संघर्षों में खो गए और आई व्यक्तिगत जीवन में शान-शौकत की लालसा तथा नग्न वासना दर्शन। लोकतंत्र की कल्पना विलीन हो गयी। जनजीवन में सुमेर के समता भरे जीवन के स्थान पर विषमता आई और आई दास प्रथा की त्रासदी। मध्य-पूर्व की कथित सामी सभ्यताओं की लगभग यही कहानी है। पर इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि बाबुल (Babylon) का विलासिता में डूबा, इंद्रिय-सुख को सर्वस्व मानने वाला जीवन पश्चिमी जगत और अंततोगत्वा यूरोप को सुमेर के जीवन की, कुछ सामी रंग से रँगी, भारतीय झलकियाँ पहुँचा सका।


प्राचीन सभ्यताएँ और साम्राज्य

०१ - सभ्यताएँ और साम्राज्य
०२ - सभ्यता का आदि देश
०३ - सारस्वती नदी व प्राचीनतम सभ्यता
०४ - सारस्वत सभ्यता
०५ - सारस्वत सभ्यता का अवसान
०६ - सुमेर
०७ - सुमेर व भारत
०८ - अक्कादी
०९ - बैबिलोनिया
१० - कस्सी व मितन्नी आर्य
११ - असुर जाति

2 comments:

  1. आपका ब्लाग देखा, बहुत अच्छा लगा, इंडियन हिस्ट्री पर ऐसा ही काम होना चाहिए। हमारे मार्क्सवादी भाईयों ने हमारे धार्मिक और लौकिक साहित्य को केवल अर्थ के चश्मे से देखा तो यह काफी कुछ अधूरी तस्वीर रही। आपके जैसे संकल्पवान लोग इतिहास के अनूठे पहलुओं को हम तक पहुंचा रहे हैं।

    ReplyDelete
  2. Ese pdh kr hme bahut fayda huaa hm

    ReplyDelete