Sunday, November 08, 2009

यहूदी और बौद्ध मत

यह समय था जब बौद्ध तथा अन्य प्रचारक भारत (जिसके अंतर्गत गांधार भी था) की पश्चिमी सीमा लाँघ कर ईरान और सुदूर पश्चिमी एशिया में अहिंसा का संदेश लेकर फैले। इस भारतीय संस्कृति के संदेश से यहूदियों में नए संप्रदाय उत्पन्न हुए। ऐसे 'फारिसी' (Pharisee) थे जिन्होंने अपनी धर्मपरायणता और तप एवं संयम के द्वारा सर्वसाधारण के प्रतिदिन के जीवन में भगवान के प्रति आस्था जगाने का यत्न किया। हज़रत मूसा के आदेशों की सद्य: परिस्थिति के अनुसार व्याख्या की, जिसके लिए लिखित 'थोरा' के अतिरिक्त मौखिक परंपराएँ भी वैसे ही बंधनकारी बनीं। वे आत्मा को अनश्वर मानते थे, पुनर्जन्म पर विश्वास करते थे और मानते थे कि बुरे कर्मों का फल भगवान देते हैं।






 ईसा और फारसी के बीच विवाद - चित्र  विकिपीडिया के सौजन्य से 

ऎसे ही यहूदियों के अंदर एक 'एस्सेनी' (Essene)  संप्रदाय आया। ये पंजाब के सैनी (ब्राम्हणों) से संबंधित कहे जाते हैं। उसका वर्णन हिंदी विश्वकोश ने (ग्रंथ १, पृष्ठ ५१०) निम्न शब्दों में किया है--

'हर 'एस्सेनी' ब्राम्ह मुहूर्त में उठता था और सूर्योदय के पहले प्रात: क्रिया, स्नान, उपासना आदि से निवृत्त हो जाता था। उसका मुख्य सिद्घांत था अहिंसा। एस्सेनी हर तरह की पशुबलि (जो येरूसलम मंदिर में प्रचलित थी), मांस-भक्षण या मदिरापान के विरूद्घ थे। हर एस्सेनी को दीक्षा के समय प्रतिज्ञा करनी पड़ती थी-'मैं यह्वे अर्थात् परमात्मा का भक्त रहूँगा। मैं मनुष्यमात्र के साथ सदा न्याय का व्यवहार करूँगा। मैं कभी किसी की हिंसा नहीं करूँगा और न किसी को हानि पहुँचाऊँगा। मनुष्यमात्र के साथ मैं अपने वचनों का पालन करूँगा। मैं सदा सत्य से प्रेम करूँगा।' आदि।

'उस समय के निकट हिंदु दर्शन के प्रभाव से इसराइल में एक और विचार-शैली ने जन्म लिया, जिसे 'कब्बाला' (Kabbalah)  (शाब्दिक अर्थ : 'परंपरा') कहते हैं। उसके सिद्घांत हैं-ईश्वर अनादि, अनंत, अपरिमित, अचिंत्य, अव्यक्त और अनिर्वचनीय है। वह अस्तित्व और चेतना से भी परे है।' 'कब्बाला' की पुस्तकों में योग की विविध श्रेणियाँ, शरीर के भीतर के चक्र और अभ्यास के रहस्यों का वर्णन है।'

ऎसा था हिंदु दर्शन का प्रभाव, जिसने यहूदियों के घोर निराशा और गुलामी के काल में भी श्रेष्ठ जीवन का संदेश देकर संस्कृति को जगाए रखा।




प्राचीन सभ्यताएँ और साम्राज्य

०१ - सभ्यताएँ और साम्राज्य
०२ - सभ्यता का आदि देश
०३ - सारस्वती नदी व प्राचीनतम सभ्यता
०४ - सारस्वत सभ्यता
०५ - सारस्वत सभ्यता का अवसान
०६ - सुमेर
०७ - सुमेर व भारत
०८ - अक्कादी
०९ - बैबिलोनिया
१० - कस्सी व मितन्नी आर्य
११ - असुर जाति
१२ -  आर्यान (ईरान)
१३ - ईरान और अलक्षेन्द्र (सिकन्दर)
१४ - अलक्षेन्द्र और भारत
१५ - भारत से उत्तर-पश्चिम के व्यापारिक मार्ग
१६ - भूमध्य सागरीय सभ्यताएँ
१७ - मिस्र सभ्यता का मूल्यांकन
१८ - पुलस्तिन् के यहूदी
१९ - यहूदी और बौद्ध मत

2 comments:

  1. जानकारी के लिए धन्यवाद.

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  2. अच्छी पोस्ट लिखी है।आभार।

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